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Thursday, 31 August 2017

prakriti प्रकृति


प्रकृति माँ की गोद निराली
इसमें समाहित दुनिया सारी
मिट्टी,वायु , शुद्ध जल
मानव उपयोगी प्रकृति का कण-कण 
पेड़ - पौधे ये हरियाली 
इनसे लगती दुनिया प्यारी
अशुद्ध हवा ग्रहण ये करते 
शुद्ध हवा हमको दे देते 
मिट्टी की महिमा है निराली
उपजाति है अन्न-धान की क्यारी
रिमझिम वर्षा की बूंदों से 
छा जाती है उपवन में हरियाली 
फिर भी मानव बाज ना आता 
हरपल कष्ट इन्हें पहुँचाता
जल प्रदूषण , वायु प्रदूषण
और प्रदूषित धरती भी
वक्त रहते संभलना होगा
पर्यावरण संरक्षण करना होगा
प्रकृति कबतक सह पाएगी
एकदिन कहर बरसाएगी 
तब जागोगे तो क्या पाओगे 
हाथ धर बस पछताओगे

1 comment:

  1. आपकी रचना बहुत ही सराहनीय है

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